तमिल राजनीति का केंद्र रहे डीएमके नेता करुणानिधि अब सियासत के साथ-साथ दुनिया को भी अलविदा कह गए हैं। दक्षिण भारत में 6 दशकों तक राज करने वाले एम करुणानिधि न सिर्फ तमिल राजनीति, बल्कि देश की मुख्यधारा की राजनीति का भी प्रमुख चेहरा थे। दक्षिण भारत में होते हुए भी केंद्र की सत्ता में उनका दखल और प्रभाव हमेशा रहा। तमिल राजनीति के पितामाह कहे जाने वाले करुणानिधि को एक कद्दावर नेता से साथ-साथ स्टाइल आइकन के रूप में भी जाना जाता था।
राजनीति पर दमदार पकड़ रखने वाले करुणानिधि ने करियर के शुरुआती दौर में कई फिल्मों की पटकथा लिखी थी। फिल्मों की वजह से लोग उन्हें पहले से ही स्टार आइकन मानते थे। इस छवि को उनके स्टाइल ने और भी प्रभावी बना दिया था। किसी फिल्म स्टार की तरह ही वो भी काला चश्मा पहने नजर आते थे । कंधे पर रखा पीला शॉल और ब्लैक शेड्स को उनका ट्रेड मार्क माना जाता था। ये ड्रेसिंग सेंस ही करुणानिधि की पहचान थी। उनकी देखा-देखी दक्षिण भारत में काले चश्मे का ट्रेंड जोर पकड़ने लगा था।
1957 तक करुणानिधि ने कभी भी काला चश्मा नहीं पहना था। पहली बार विधानसभा पहुंचने पर भी वो बिना चश्मे के ही नजर आए थे। लेकिन 1960 के बाद उन्होंने काला चश्मा पहनना शुरु कर दिया। दरअसल एक एक्सीडेंट के दौरान उनकी बांई आंख जख्मी हो गई थी, जिसके बाद उन्हें मजबूरन काला चश्मा पहनना पड़ा। धीरे- धीरे उन्हें ये चश्मा पसंद आने लगा और इसके बाद उन्होंने अपनी आधी जिंदगी काला चश्मा पहन कर ही गुजार दी।
लगभग आधे दशक बाद साल 2017 नवंबर में डॉक्टर की सलाह पर करुणानिधि ने अपना 46 साल पुराना चश्मा बदल लिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके नए चश्मे को खासतौर पर जर्मनी से इंपोर्ट किया गया था। उनके इस चश्मे को खोजने में 40 दिन का समय लगा था।
इसे संयोग ही कहा जा सकता है कि करुणानिधि के धुर विरोधी अन्नाद्रमुक नेता एमजी रामचंद्रन भी काला चश्मा ही पहना करते थे।
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